चीन की धमकी: चाइनीज माल नहीं खरीदना भारत को महंगा पड़ेगा



चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो: PTI)
दीपावली के आते ही भारत के अलग अलग हिस्सों और सोशल मीडिया पर मेड इन चीन वाले प्रोडक्ट का बहिष्कार करने को लेकर बहस छिड़ी हुई है. इसी बीच अब चीन के दूतावास की ओर से भी एक बयान जारी कर दिया गया है. बयान में कहा गया है कि चीन के प्रोडक्ट का बहिष्कार करने से चीन को ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि वह दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक देश है और 2015 में उसका निर्यात 2276.5 अरब डॉलर के बराबर था और भारत को किया गया निर्यात इसका मात्र दो प्रतिशत था.
नई दिल्ली में चीन के दूतावास की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि “इस तरह के किसी बहिष्कार का उसके देश के निर्यात पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा उल्टा इसका सबसे ज्यादा नुकसान भारत के व्यापारियों और ग्राहकों का होगा क्योंकि उनके पास कोई समुचित विकल्प नहीं है.”

नीची आवाज में दी धमकी

नई दिल्ली में चीनी दूतावास के प्रवक्ता झी लियान ने कहा कि "चीन इस बात से ज्यादा चिंतित है कि ऐसे बहिष्कार से चाइनीज उद्यमी भारत में निवेश करने से पीछे हटेंगे. जिस वजह से द्विपक्षीय सहयोग भी प्रभावित हो रहा है जो न तो चीनी अवाम चाहती है और न ही भारतीय यह देखना चाहेंगे."

भारत को होगा घाटा

बिना किसी विकल्प के चीन के प्रोडक्ट का बहिष्कार करने से घाटा सिर्फ भारतीय व्यापारियों और कस्टमर्स को होगा. झी लियान ने कहा कि कैसे चीन और भारत का व्यापारिक रिश्ता मजबूत और गहरा होता जा रहा था, पिछले 15 सालों में 24 गुना भारत और चीन के बीच व्यापर बढ़ा है. द्विपक्षीय व्यापार को देखे तो साल 2000 में 2.9 अरब डॉलर से 2015 में 71.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच कर भारत चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है.
दक्षिण एशिया में चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है.

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ