क्या सिर्फ 100 करोड़ हिंदुस्तानियों के प्रधान सेवक हैं पीएम मोदी?



प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नाम एक भारतीय नागरिक का खत


दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की गद्दी पर आसीन माननीय "प्रधान सेवक"उर्फ़ प्रधान मंत्री
नरेन्द्र मोदी जी!!

सबसे पहले आप को भारत जैसे विशाल प्रजातंत्र पर भी एक बादशाह की तरह से ढाई साल गुज़ारने पर मुबारकबाद पेश करता हूं,
मोदी जी!
लालक़िला के प्राचीन से आप द्वारा दिये गये प्रथम भाषण का हर एक अंश आज तक कानों में गूंजता है,
लेकिन
दिमाग़ कहता है उसे जुमला समझो!
पर दिल है कि अब भी मानता नही!

प्रधान सेवक जी!
आज तक आपने जितनी बार भी देशवासियों को संबोधित किया है हर मरतबा आप की जुबान से एक
लफ्ज़ सुन कर मैं आशचर्य में पड़ जाता था जब आप कहते थे कि मैं 100 करोड़ भारतवासियों का प्रधानसेवक हूं,
लेकिन आप के कार्यकाल के ये ढाई साल इस बात
को सिद्ध कर गये कि आपने बाक़ी 25 करोड़ को भारतीय समझा ही नहीं,इसी लिये तो पिछले ढाई सालों में गौआतंक,हिंदुत्वआतंक ,और पुलिसिया आतंक ने एक साथ मिलकर इन 25 करोड़ अल्पसंख्यक समुदाय को बैकफुट पर ला दिया है,
संयोग की बात है कि इन सब का निशाना बनने वाले दादरी के अख़लाक़,हरियाणा की रेप पीड़ित फैमिली,झारखणड केमिन्हाज,
जे.एन.यू के नजीब,कशमीर केतड़पते हुए हज़ारों नागरिक,और अब भोपाल के आठ विचाराधीन कै़दी,इसी समुदाय से ताल्लुक़ रखते हैं,
लेकिन चलिये जिन 100 करोड़ को आप अपना समझते हैं,वो भी आप के सिस्टम और आप की सरकार के हिंदुत्वप्रेम से कम प्रभावित नहीं हुए हैं,
देश के विभिन्न क्षेत्रों में दलितों को गौरक्षा के नाम पर पिछले दिनों
जितना मारा गया वो शायद सर्वप्रथम दलित बाबा साहब
अम्बेडकर के भारतपर एक कलंक था,यही नहीं आपकी सरकार ने तो लोकतंत्र के मायनों को ही बदल डाला है,दिल्ली में अघोषित आपातकाल हो या या आर्थिक स्तर पर पतन होता हुआ भारत,
सर्जिकल स्ट्राईक के नाम पर
गै़रज़रूरी वाहवाही हो या तीन तलाक़ के नाम पर आप की सरकार का महिला प्रेम, मीडिया को सरकार का तरजुमान बनाने से लेकरNDTV पर बैन तक,
ये सभी घटनाएं सोशल मीडिया व प्रिंट मीडिया पर अगरचे आप के विरोधियों द्वारा एक जोक या जुमला समझ कर टाल दिये जाते हों,या आप के भक्तों द्वारा इन्हें विकास और राम की फतह के रूप में बयान किया जाता हो,
लेकिन सच ये है कि गांधी व आज़ाद,अम्बेडकर व अशफाक़ के भारत का ये सबसे काला दौर है जहां लोकतंत्र के मापदंडों की धज्जियां खुद सरकार के संरक्षण में उड़ाया जा रहा है,

मोदी जी!

सरहदों पर हमारे जांबाज़ फौजी हर दिन शहीद हो रहे हैं,देश के अंदर खुदकुशी कर रहे हैं,देश भर में हिंदुत्ववादी संगठनें,गौरक्षक ताक़तें भय और डर का माहौल बनाये हुए हैं,मीडिया की हत्या की जा रही है,धार्मिक व मौलिक स्वतंत्रता को खत्म करने की कोशिश की जा रही है,
मुसलमान होने का मत़लब ग़द्दार व आतंकी होना समझा जाने लगा है,
दलितों को फिर से अछूत समझा जाने लगा है,देश की आर्थिक स्थिति आप के सामने है.देश के किसान हजा़रों करोड़ रुपये के कर्ज़ तले दबे हुए हैं!11 प्रदेश सूखे से पीडि़त हैं!
महंगाई आसमान छू रही है!
मुद्रा की स्थिति भी बहूत नाज़ुक है.
मिनरल वाटर से लेकर रसोई गैस तक,दाल से लेकर चीनी तक की की़मत अब सोने से कम नही़ है!
एैसे में,आपकी सरकार देश के ग़रीबों,किसानों की गाढ़ी कमाई को वसूल करके कारपोरेट जगत पर मेहरबान हो रही है!

मोदी जी!

आपको पूर्ण बहुमत मिलने में आपका बहुत बड़ा योगदान हो ऐसा नही है.ठीक है की आपका गुजरात मॉडल लोगों को आकर्षित करता है,
इस गुजरात मॉडल ने लोगों में एक आशा कासंचार किया मगर कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील निःसंदेह आम आदमी के महंगाई, घोटालों,
भर्ष्टाचार से उतपन्न आक्रोश ने ही ठोकी थी.
आपकी जीत दरअसल आपसे आशा और कांग्रेस के खिलाफ व्यापक आक्रोश का परिणाम था,
इसी लिए आपकी सरकार को ज्यादा खुशफहमी ना पालकर लोगों की भलाई के लिए ठोस व सार्थक
कदम उठाने शुरू कर देने चाहिए थे।
पर प्रधान मंत्री जी एैसा नहीं हुआ,
बल्कि आप के बड़े बड़े मंत्री बयान बाजी़ में लग गये!आप विदेश यात्रा पर निकल गये!बाहर आपके जुमले खूब सुनने को मिलते हैं!
पर देश में आए दिन घटित मुददों पर आप की चुप्पी को हम क्या समझें?
हम आप को बार बार यह कहते हुए सुन चुके हैं कि अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कठोर फैसले लेने की जरूरत है जरूर लीजिये कठोर फैसले।
मगर ये कठोर फैसले आम आदमी पर और रोजमर्रा की जरूरतों पर लागू ना करके हिन्दुस्तान के उन मुठ्ठी भर लोगों पर लागू करें जो देश की अकूत सम्पत्ति पर सांप बने बैठे हैं,
क्योंकि इससे आप पर तो कोई फर्क़ नहीं पड़ने वाला,क्योंकि पांच लाख का जोड़ा आप को हर दिन पांच मरतबा अब भी पहनने को, मिलता है तब भी मिलेगा!
पर सोचिये उस किसान के बारे में जो पैसे ना होने की वजह से खाट में खुद बैल की तरह नथ कर अपना खेत जोतता है!
उस ग़रीब बच्चे के बारे में सोचिये जो ग़रीबी की वजह से स्कूल से अंडा चुरा कर अपनी मां के लिए ले जाता
है.मांझी जैसे उन आदिवासियों के बारे में जो पैसे ना होने की वजह से मीलों अपने रिशतेदारों की लाशों को पैदल लेकर चलते हैं,

श्री मोदी जी!
आप राष्ट्रपति के इफ़तार पार्टी में ना जाएं!ईद बक़रीद की बधाई ना दें,सर पर टोपी भी ना लगाएं!कोई ज़रूरत नहीं दिल में संघ और बाहर सब के संग चलने की!
और अपने चुनावी वादों पर अमल की भी ज़रूरत नहीं है.क्योंकि आप ही ने कहा था की वो सब चुनावी बातें थीं.
पर एक प्रधान मंत्री होते हुए आप के जो कृतव्य हैं आप उनका तो पालन करिए.लॉ एंड आर्डर को मज़बूत करिए,देश को लुटने से बचाइए,
महंगाई पर विराम लगाइए!
किसानों व फैजियों को आत्महत्या से बचाइए!हम देश वासियों को ना तो DIGITAL INDIA की ज़रूरत है,ना NSG में आने की.हमें तो एक एैसा देश चाहिए जहां का हर व्यक्ति रात में भर पेट खाना खाकर सोए!
और जहां सभी देश वासी मिल जुलकर प्यार से रहें.

आदारणीय प्रधान मंत्री जी!
कारपोरेट जगत और संघ ने आप के साथ चुनाव में जितना इहसान किया था आप की सरकार ने इन दो सालों में उसका बदला चुकता कर दिया है!
अब आप सख़्त क़दम उठाईए!
हिंदुत्व कट्टरता के खिलाफ़ सिस्टम और मीडिया को मज़बूत
करिए,भष्ट्राचार के खिलाफ़ कठोर क़दम उठाईए,अख़लाक़ व मिन्हाज की फैमिली को इंसाफ़ दीजिए,नजीब को जल्द वापिस लाने के लिए गृहमंत्रालय को पाबंद करिए,भोपाल एनकाऊन्टर की सुप्रीम कोर्ट से निशपक्ष जांच करवाईए,धुर्वीकरण व पोलोराईज़ेशन की राजनीति को बंद कराइए,बदला लेने की भावना खत्म करके बदलने की राजनीति करिए और कराईए,
कुछ दिन हमारे देश भारत में रुकिए!
आप के पास बहुमत है.आप कर सकते हैं बस कर गुज़रिए.
क्योंकि देश की 125 करोड़ जनता आप से अब भी आशा लगाए बैठी है.
इस आशा को निराशा में ना बदलिए.
या फिर आखिरी उपाय यही है कि इमरजेंसी की घोषणा करके
आयरनमैन बन जाईए,

आप के संग अपने मन की बात साझा करने वाला

"एक भारतीय नागरिक"
मेहदी हसन एैनी का़समी

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