मां...एक शब्द, एक पुकार जिसमें पूरा ब्रम्हांड समाया हुआ है. पर क्या एक जीवन को इस धरती पर लाने वाली औरत ही मां होती है? उस औरत को आप क्या कहेंगे जो किसी और के अंश को प्यार-दुलार, देखभाल देकर जिंदा रखे? अपने बच्चे को तो सभी प्यार देते हैं लेकिन क्या वो शख्स खास नहीं जो सड़क पर भीख मांगते, दाने-दाने को तरसते बच्चे के सिर पर हाथ रखे?
आज एक ओर जहां मानवता हर रोज शर्मशार हो रही है वहीं अभी भी कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें देखकर इंसानियत के जिंदा होने का एहसास होता है. जिन्हें देखकर उम्मीद जगती है.
ये कहानी है नाइजीरिया के एक बच्चे की. जिसे उसी के मां-बाप ने अशुभ मानकर सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया था. एक दो साल का बच्चा अशुभ और कलंकी कैसे हो सकता है ये तो वही जानें लेकिन कोई था जिसने सिर्फ और सिर्फ उस दो साल के बच्चे को देखा. उसे सिर्फ उस बच्चे का कंकाल में तब्दील हो चुका शरीर दिखाई दिया. उसकी आंखों की मायूसी दिखाई दी. दिखाई दी तो सिर्फ और सिर्फ उसकी भूख.
उस समय तक तो उस बच्चे के पास कोई नाम भी नहीं था. अंजा रिंगरेन लोवन को वो सड़क पर मिला था. उसके मां-बाप ने उसे अशुभ और राक्षस समझकर सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया था. अंजा को जिस समय वो बच्चा मिला उसका शरीर गल चुका था. शरीर में कीड़े लग चुके थे. अंजा एक चैरिटी वर्कर हैं.

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