पिता6 दिन बाद ही बेटी का कन्यादान करने की तैयारी में जुटे थे, पर विधाता को कुछ और ही मंजूर था। बेटी के हाथ पीले करने से पहले ही वे काल का ग्रास बन गए। बेटी ने अन्य बहनों के साथ उनकी अर्थी को कंधा दिया।
यह वाकया शहर के उपनगर सेंती क्षेत्र का है। खनिज विभाग के सेवानिवृत्त चालक शांतिलाल पुत्र धनराज दमामी का शनिवार सुबह निधन हो गया। उनके चार बेटियां एक बेटा है। तीन बेटियों का पूर्व में विवाह हो चुका है। सबसे छोटी बेटी पूजा का विवाह कुछ दिन बाद ही 11 नवंबर को ही होना था। घर में शादी की तैयारियों के साथ हंसी-खुशी का माहौल था। शनिवार तड़के शांतिलाल को दिल का दौरा पड़ा। सांवलियाजी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद परिजन उनको उदयपुर ले जा रहे थे, लेकिन देबारी के पास ही उनका निधन हो गया। शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। पुत्र सहित करीबी रिश्तेदार अर्थी उठाने लगे तो चारों बेटियां भी आगे गई। चारों ने अर्थी को कंधा दिया तो माहौल और गमगीन हो गया।
चित्तौड़गढ़. शहर के सेंती क्षेत्र में पिता की अर्थी को कंधा देतीं बेटियां।

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