मुंबई (उत्तम हिन्दू न्यूज): लॉकडाउन और कर्फ्यू के बीच सभी तरह के कामकाज ठप होने से इनमें काम करने वाले मजदूर मुश्किल में हैं। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में तो कई बार बड़ी संख्या में मजदूर घर जाने के लिए बाहर निकल चुके हैं। इस बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि राज्य में फंसे मजदूरों को वापस भेजने के लिए सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है।
रविवार को उन्होंने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि एक बात तो तय है कि ट्रेनें तो नहीं खुलेंगी, लेकिन मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है और इस बाबत दूसरे राज्यों से बात की जा रही है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि ट्रेन खुली तो भीड़ होगी और अगर भीड़ हुई तो संक्रमण बढ़ने का और भी अंदेशा रहेगा। इस वजह से लॉकडाउन को और भी बढ़ाना पड़ेगा।
सीएम ने कहा कि कोटा में फंसे राज्य के छात्रों को भी सरकार वापस लाने के लिए बात कर रही है। उन्होंने कहा कि इस आपका की आशंका किसी को नहीं थी. उन्होंने कहा कि वे हिन्दू, मुस्लिम, क्रिश्चयन सभी धर्मों के लोगों को धन्यवाद देना चाहेंगे। उद्धव ठाकरे ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे कोरोना से जंग में सहयोग करें। सीएम ने कहा कि अभी गलियों में आकर नमाज पढ़ने का वक्त नहीं है। सीएम ने कहा कि वे अपील करते हैं कि लोग घर में ही रहकर नमाज अदा करें।
सीएम ने कहा कि भगवान कहां है? इस वक्त हमारे भगवान डॉक्टर, पुलिस, नर्स और सफाई कर्मचारी ही हैं, उनका आदर करना ही असल पूजा है। राज्य में कोरोना की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए सीएम ने कहा कि लॉकडाउन की वजह से हम कोरोना का तेजी से संक्रमण रोकने में सफल रहे हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने राज्य के लोगों को सलाह दी है कि इस वक्त राजनीति न करें. ये अच्छी पहल है।
बता दें कि महाराष्ट्र में सिर्फ 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी ही कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। राज्य में कल 107 पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव हैं। इनमें 20 पुलिस ऑफिसर और 87 जवान हैं। 7 पुलिस अधिकारी कोरोना से इलाज करवाकर ठीक हो चुके हैं जबकि इलाज के दौरान 2 पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि इन पुलिस के जवानों को सरकारी नियमों के मुताबिक मुआवजा तो दिया ही जाएगा, इसके अलाव भी सरकार कोशिश करेगी।

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