पति की मौत पर रोते-रोते ही निकला पत्नी का भी दम



नई दिल्ली। सच्चे प्यार के किस्से कहानियां तो आपने बहुत सुनी होंगी, हम आपको एक सच्ची प्रेेम कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं। अक्सर लोग प्यार में साथ जीने मरने की कस्में खाते हैं, ज्यादातर केसेज में साथ जीते भी हैं, लेकिन साथ मरने की कसम कोई सौ में से एक ही निभा पाता है।

गांव की छोटी सी झोपड़ी में एक साथ जिंदगी बसर करने वाले वृद्ध दंपति की सांसों का सफर एक साथ थमा। बीमारी से पीडि़त 63 वर्षीय पति महेश ठाकुर ने मंगलवार की सुबह अंतिम सांस ली तो उसकी 61 वर्षीय पत्नी शीलाबाई सदमे में आ गई और रोते-रोते कुछ देर बाद उसकी सांसों ने भी साथ छोड़ दिया। एक ही घर से पति-पत्नी दोनों की एक साथ अर्थी निकलते देख ग्रामीणों की आंखें छलक पड़ीं।

ग्रामीणों का कहना है कि दोनों में अटूट प्रेम था और दोनों मेहनत मजदूरी कर अपना गुजारा करते थे। सिहोरा बोहानी के पास गाम हर्रई में हुई इस घटना के किस्से आसपास के गांव तक फैल गए। मंगलवार की सुबह जब दंपति की अर्थी उठी तो सारा गांव उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ आया।


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