पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग के अधिकारी सुरजीत सिंह ने शनिवार को सपरिवार पाकिस्तान छोड़ दिया। एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
‘जियो न्यूज’ के अनुसार, सुरजीत को पाकिस्तान ने 27 अक्तूबर को अस्वीकार्य घोषित कर दिया था तथा सपरिवार 48 घंटे के अंदर देश छोड़ने को कहा था। सुरजीत के निष्कासन का आदेश ऐसे समय आया, जिससे कुछ ही घंटे पहले जासूसी का आरोप लगने के बाद पाकिस्तानी उच्चायोग के एक अधिकारी को भारत ने देश छोड़ने को कहा था।
पाकिस्तान के विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त गौतम बम्बावले को गुरुवार को तलब किया था। साथ ही सुरजीत सिंह को अस्वीकार्य घोषित करते हुए शनिवार तक देश छोड़ने को कहा था। पाकिस्तान विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा, विदेश सचिव ने इस भारतीय अधिकारी की गतिविधियों पर गहरी चिंता जताई, जो वियना समझौते और स्थापित राजनयिक नियमों का हनन करते थे।
पाकिस्तान की ओर से यह कार्रवाई उस समय की गई, जिससे कुछ घंटे पहले भारतीय विदेश सचिव एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बसित को मोहम्मद अख्तर के खिलाफ प्रतिवाद दर्ज कराने के लिए तलब किया। अख्तर पाकिस्तान उच्चायोग में वीजा अधिकारी थे, जिन पर भारत ने जासूसी करने का आरोप लगाया। बसित को बताया गया कि अख्तर भारत में अस्वीकार्य हैं इसलिए उन्हें 29 अक्तूबर तक भारत छोड़ देना चाहिए।
भारत ने अख्तर पर भारतीय रक्षा दस्तावेजों को हासिल करने का आरोप लगाया था। भारत ने कहा कि अख्तर 18 महीनों से एक जासूसी नेटवर्क चलाने में मुख्य भूमिका निभा रहे थे। उन्हें राजनयिक छूट के तहत रिहा किया गया, लेकिन 48 घंटे के अंदर देश छोड़ने को कहा गया।
हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने कहा कि अख्तर को गलत और निराधार आरोपों में तीन घंटे के लिए हिरासत में रखा गया, जो वियना समझौते का उल्लंघन है। लेकिन भारत ने कहा कि पाक अधिकारी के साथ कोई दुव्र्यवहार नहीं हुआ।

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