भोपाल। सोमवार को सिमी के 8 आतंकियों के जेल से फरार होने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा हुए एनकाउंटर में कई सवाल उठ रहे हैं। मध्य प्रदेश पुलिस और जेल प्रशासन की बातों पर सवाल उठाते हुए राजनीतिक दलों ने इस एनकाउंटर की न्यायिक जांच की मांग की है। दरअसल इस एनकाउंटर के तीन अलग-अलग वीडियो सामने आए हैं जिसकी वजह से इस एनकाउंटर की हकीकत पर सवाल उठ रहे हैं।
1) एनकाउंटर के एक वीडियो में दिख रहा है कि फरार आतंकी सरेंडर करना चाहते थे लेकिन पुलिस ने उन्हें इसका मौका क्यों नहीं दिया?
2) जैसा कि वीडियो में दिख रहा है कि कुछ ही दूरी पर संदिग्ध दिखाई देते हैं। तब तक एक आवाज आती है- कंट्रोल ये पांचों लोग हमसे बात करना चाहते हैं। तीन भागने की कोशिश कर रहे हैं। चलो उन्हें घेर लो। इसके बाद गोलियों की आवाज आने लगती है।
3) एक दूसरे वीडियो के मुताबिक एनकाउंटर में पुलिसवाला एक घायल कैदी को निशाना बनाकर फायरिंग कर रहा है। क्या जख्मी कैदी को जिंदा गिरफ्तार नहीं किया जा सकता था?
4) एक और वीडियो के मुताबिक पुलिस संदिग्ध आतंकियों के शरीरों की जांच कर रही है जिसमें एक पुलिसवाला साफ तौर पर एक मरे हुए शख्स पर गोलियां चला रहा है।
5) जेल के वॉच टावर पर कोई तैनात क्यों नहीं था? भोपाल की हाई सिक्योरिटी जेल का सीसीटीवी फुटेज कहां है?
6) मध्य प्रदेश पुलिस के तीन जवानों के घायल होने की बात सामने आई थी लेकिन इन तीनों को ही गोली नहीं लगी है बल्कि धारदार हथियार से चोटें आई हैं।
7) जेल मैन्युअल के अनुसार किसी भी जेल में आठ से अधिक खूंखार अपराधियों को नहीं रखा जाना चाहिए। ऐसे में जेल मैनुअल के खिलाफ एक साथ 35 खूंखार कैदी क्यों रखे गए?
8) क्या आंतकियों के पास हथियार थे, अगर हां तो कहां से आए?
9) जेल से फरार होने के बाद आतंकियों के पास जींस टी-शर्ट जैसे साफ सुथरे कपड़े उनके पास कैसे आए?
10) आठों सिमी आतंकियों का एक साथ एक ही दिशा में भागने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
11) हाई अलर्ट के दौरान 35 आतंकवादियों को रखे जाने वाली जेल की सुरक्षा 2 सिपाहियों के भरोसे कैसे छोड़ दी गई?
12) जेल से फरार होने के बाद आतंकवादियों ने 8 से 9 घंटे तक भोपाल के आसपास ही रहने का फैसला क्यों किया? जबकि प्रदेश की सीमा से बाहर भागने के लिए 8 से 9 घंटे काफी होते हैं।
मध्य प्रदेश के दो बड़े पुलिस अधिकारियों के बयान में भी मतभेद सामने आया है-
एमपी पुलिस के एटीएस आईजी संजीव शमी ने कहा कि उनके पास फायर आर्म्स नहीं थे पर खतरनाक आरोपी हैं। आतंक के आरोप हैं और जेल आरक्षी का कत्ल करके आए थे। हमारी टीम ने उन्हे चैलेंज किया और जब वो फरार होनी की सूरत में आ गए तब आगे की कारवाई हुई।
वहीं, भोपाल जोन के आईजी योगेश चौधरी ने कहा कि हमें एक इनपुट मिला था। भोपाल पुलिस और एसटीएफ ने इलाके को घेरा। अचारपुरा गांव के पास मलीखेड़ा जगह हैं। इन्हें चैलेंज किया गया जिसके बाद इन्होंने फायर किया। जवाबी फायरिंग में ये मारे गए।

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