यूरोपीय यूनियन भी 2018 तक बंद करेगा 500 यूरो का नोट



जयपुर ।
भारत पहला उदाहरण नहीं है, जहां किसी तरह के करेंसी नोट को बंद कर कालेधन या नकली नोटों पर लगाम कसने की कोशिश की गई है।
आतंकवाद की फंडिंग, ड्रग माफिया व कालेधन को रोकने के लिए यूरोपीय यूनियन (ईयू) भी अपने सबसे बड़े 500 यूरो के नोट को 2018 तक बंद करने की घोषणा कर चुका है।
फ्रैंकफर्ट स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने 04 मई को यह घोषणा हुई। यूरोप में 500 यूरो के नोटआंतक की फंडिंग के लिए कुख्यात होने पर 'बिन लादेन नोट' के नाम से चर्चित है।
6.5 करोड़ रुपए आ जाते थे एक बैग में
दरअसल, एक मिलियन डॉलर या यूं कहें कि करीब 6.5 करोड़ रुपए यदि 500 यूरो के नोटों के रूप में रखे जाएं तो उन्हें आसानी एक बैग में रखा जा सकता था। वहीं, यह नोट आसानी से डॉलर में बदले जा सकते हैं। यूरोपीय विशेषज्ञों का मानना था, इसी कारण से 500 यूरो के नोटों का प्रयोग कालेधन व आतंकी फंडिंग में सरलता से किया जा रहा है।
अमरीका भी लगा चुका है रोक
अमरीका में इन दिनों सबसे बड़ा करेंसी नोट 100 डॉलर का है। वर्ष 1969 अमरीकी फेडरल रिजर्व ने ऐसे कारणों के चलते 500, 1000, 5000 व 10,000 डॉलर के लीगल बिल समाप्त कर चुका है।
स्वीडन दुनिया का पहला कैशलेस देश बनेगा
स्वीडिश सेंट्रल बैंक रिक्सबैंक के अनुसार वर्तमान में स्वीडन में होने वाले ट्रांसजेक्शन का मात्र दो प्रतिशत नकद होता है। वर्ष 2020 तक यह गिरकर 0.5 प्रतिशत रह जाएगा। 2009 में स्वीडिश मुद्रा कैरोना की संचार 106 बिलियन से गिरकर 2015 में मात्र 80 बिलियन रह गया है। वहीं, स्वीडन के कुल 1600 बैंक शाखाओं में से 900 नकदी नहीं रखते हैं। न ही वे इसका लेन देन करते हैं। ग्रामीण इलाकों में कोई एटीएम नहीं।
-बाजार से मौजूदा 500 और 1,000 रुपए के नोटों को हटाने का सरकार का फैसला कालेधन पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' या नाप-जोख कर किया गया हमला है। कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार की तरफ से उठाया गया यह सबसे साहसिक और बड़ा कदम है।
हसमुख अधिया, राजस्व सचिव
- देश के लिए परेशानी का सबब बन चुके कालेधन और नकली मुद्रा के खिलाफ सरकार की तरफ से उठाया गया यह एक और कदम है। लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करना चाहिए।

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